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अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के मायने

आज एक समाचार पढ़ा लगा कि अभिव्‍यक्ति के स्‍वतंत्रता के मायने क्‍या है ? खबर यह थी कि बेलारूस में इसलाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद साहब का कार्टून प्रकाशित करने वाले एक अखबार के संपादक को जेल भेज दिया गया है।


यह घटना इस्‍लामिक कट्टरवाद की ओर इशारा करता है कि जहॉं जहॉं इस्लाम का प्रभुत्‍व है वहॉं वहॉं अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता तार तार की जाती है चाहे वह भारत हो या पाकिस्‍तान या फिर और कोई राष्‍ट्र क्‍यो न हो?


क्‍या हिन्‍दू धर्म की पूजा प‍द्धति तथा देवी देवताओं को अपमानित करना ही अभिव्‍यक्ति स्‍वतंत्रता है? और अगर इस्‍लाम के खिलाफ कुछ बोला या लिखा जाये तो अभिव्‍यक्‍ित कि स्‍वतंत्रता की धज्जियॉं उड़ा जाती है। किस पैमाने पर तय किया जाता है कि पैगम्‍बर का कार्टून अपराध है और देवी देवताओं की अश्‍लील चित्र विधि सम्‍मत है ? कहॉं चले जाते है अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के ठेकेदार जावेद अख्‍तर, शाबाना आजमी, जब तस्‍लीमा और रूश्‍दी पर आरोप लगाये जाते है। यह भारत है, जहाँ पर इस प्रकार के भेद भाव किये जाते है। यह दशा सो‍चनीय है और इस ओर सोचा जाना चाहिऐ, कि जब इस्‍लाम पर पैगम्‍बर के अपमान पर सजा हो सकती है तो भारत माता और माता सरस्‍वती को आपमान किये जाने पर यह कार्यवाही क्‍यो नही होती है? क्‍या अभिव्‍यक्ति की स्‍वातंत्रता के यही मायने है ?  

3 टिप्पणियाँ:

  विक्षिप्त

22 January, 2008 15:30

आप दो नावों में एक साथ पैर रखने की कोशिश कर रहे हैं । पहले यह तो बताएँ कि आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हैं या विपक्ष में ।

यदि पक्ष में हैं तो दोनों विषयों में आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए ।

यदि विपक्ष में हैं तो दोनों समान रूप से निंदनीय हैं । "यह घटना इस्लामिक कट्टरवाद की ओर इशारा करता है" : तब आप यह नहीं कह सकते । यह बात कहकर आप अपने पक्षपाती रवैये का परिचय दे रहे हैं ।

  Sanjay Sharma

23 January, 2008 11:30

इस टाइप की परिभाषा केवल जावेद अख्तर ,शबाना आज़मी या कोई अन्य मुस्लिम ही नही गढ़ते , हिंदू सबसे आगे है मकबूल के बचाव मे . अखबार मे टीवी पर ब्लॉग मे हर जगह नाम से हिंदू दिखने वाला ज्यादा मात्रा
मे माँ के नग्नता का समर्थक है .हमे कुछ ख़ास नही इन समर्थक को नंगा करते रहना है बस . सब लाईन पर
आ जायेंगे .

  Sanjay Sharma

23 January, 2008 11:31

इस टाइप की परिभाषा केवल जावेद अख्तर ,शबाना आज़मी या कोई अन्य मुस्लिम ही नही गढ़ते , हिंदू सबसे आगे है मकबूल के बचाव मे . अखबार मे टीवी पर ब्लॉग मे हर जगह नाम से हिंदू दिखने वाला ज्यादा मात्रा
मे माँ के नग्नता का समर्थक है .हमे कुछ ख़ास नही इन समर्थक को नंगा करते रहना है बस . सब लाईन पर
आ जायेंगे .