Spiga

खुरापात हुई तभी आवाज़ भी उठ रही है

मैने कभी प्रत्‍यक्ष ब्‍लागिंग नही की, किन्‍तु मै हिन्‍दी चिट्ठाकारिता में तब से जुड़ा हुआ हूँ जब से प्रमेन्‍द्र-जीतेन्‍द्र चौधरी विवाद प्रारम्‍भ हुआ था। तब से लेकर आज तक यहीं समझ में आया कि ब्‍लाग कि मठाधीशी होती क्‍या है? तब और अब में कोई भी अन्‍तर नही आया। यह जरूर है कि मै ब्‍लागिंग से इतना नजदीक और हस्‍तक्षेप करने के बाद भी मैने कभी लेखन कार्य नही किया।

आज मेरा लेखन में आना भी इत्‍तफ़ाक है कि प्रमेन्‍द्र की परीक्षाओं के कारण ब्‍लागिंग से दूर रखने के लिये उसकी महाशक्ति को अपने कब्‍जे में लेना पड़ा, ताकि परीक्षा में ध्‍यान दे सकें। जैसा पहले ही मैने उल्‍लेख किया कि मेरा ब्‍लागिंग से दूरी रही है किन्‍तु प्रमेन्‍द्र के साथ हुऐ विवादों से नही, और यही कारण है कि आज हिन्‍दी ब्‍लागिंग की मठाधीशी के बारे में काफी कुछ पता है।

आज मै यह लेख न लिखता किन्‍तु वि‍वश होना पड़ा, आज जगदीश भाटिया ने एक लेख लिख कर अपनी सफाई प्रस्‍तुत की थी कि मैने उक्‍त काम नही किया है। किन्‍तु जब मैने उस पर टिप्‍पणी की तो यह देखने में आया कि वह प्रकाशित नही हुई, जो भाटिया जी की दूरदर्शिता को दर्शाता है टिप्‍पणी प्रका‍शन या अप्रकाशन भाटिया जी का निर्णय है किन्‍तु जो हुआ वह सोचने का विषय है। कि इतने बड़े-बडे महारथी भाटिया जी के सर्मथन में आ गये-

अब वह टिप्‍पणी आपके सामने है-

किसी एक एक को नही कह रहा हूँ, किन्‍तु खुरापात हुई तभी आव़ाज भी उठ रही है, नही तो किसी को सनक नही सवार होती है आरोप लगाने की।

चाहे दाल में कुछ काला हो या पूरी दाल ही काली हो यह दाल बानने वाले को ही पता होगा।

ब्‍लागवाणी पर देवाशीष जी की टिप्‍पणी में आपके प्रति किया जा रहा सर्मथन यह बताता है कि आप ताकनीकी जानकार नही है किन्‍तु चिट्ठाकारी के महाभारत में शिखड़ी को आगे खड़ा कर तीर चलाने वाले काफी धर्नुधर है।

अब वह आपके सर्मथन करने वाला भी हो सकता है।

हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएँ हुई है जो अपने आपको ब्‍लागिंग का दादा साबित करने और दर्शाने वाले कदम लगते है, इसकी चर्चा तो वही करेगा जिसके साथ घटना हुई है। किन्‍तु यह बात ध्‍यान रखना होगा कि जिसने भी अपने को हिन्‍दी ब्‍लाग का सम्‍प्रभु बताने की कोशिश की वह टिका नही और सम्‍प्रभुता दादागीरी से नही आती है। वक्‍़त है सुधरने और सामजस्‍य बिठाने का, दादा‍गीरी पर टिकी विरासत का अधिपत्‍य लम्‍बा नही हुआ है।

आज नंगो का ही दौर जो जितना बड़ा नंगा है वह उतना ही बड़ा पपुलर कहलाता है।

मै कोई लेखक नही किन्‍तु समाज में जो कुछ घटता है उससे इत्‍तफ़ाक जरूर रखता हूँ। मेरे पिछले लेख में दो टिप्‍पड़ी जो मेरे लिखने के काफी समय बाद आई थी। प्रथम टिप्‍पड़ी कहती है -

विक्षिप्त said...

आप दो नावों में एक साथ पैर रखने की कोशिश कर रहे हैं । पहले यह तो बताएँ कि आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हैं या विपक्ष में ।

यदि पक्ष में हैं तो दोनों विषयों में आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए ।

यदि विपक्ष में हैं तो दोनों समान रूप से निंदनीय हैं । "यह घटना इस्लामिक कट्टरवाद की ओर इशारा करता है" : तब आप यह नहीं कह सकते । यह बात कहकर आप अपने पक्षपाती रवैये का परिचय दे रहे हैं ।

जब मै इस टिप्‍पड़ी को पड़ता हूँ तो पाता हूँ कि अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के बारे में मुझसे पूछा जाता है। मित्र मै बस यही कहना चाहूँगा कि अभिव्‍यक्ति की स्‍वंतत्रता हर किसी को मिलती चाहिए, किन्‍तु अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता नंगी नही होनी चाहिए। क्‍या किसी की धार्मिक भावना का अपमान करना ही अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता है? इस्‍लामिक कट्टरवाद आज चरम पर है और आप गुजरात जैसे अपवाद को छोड़ कर इस कौम पर टिप्‍पड़ी नही कर सकते है। आपको इस कौम के द्वारा या तो समाप्‍त कर दिया जायेगा या तो दबा दिया जायेगा। जहॉ तक पक्षपाती रवैया का प्रश्‍न है तो मुझे यह कहने में संकोच नही है कि मै हिन्‍दू है और जो भी इस देश में रहते है उनके पूर्वज हमारे आराध्‍य श्रीराम है। अगर सच कहना पक्षपाती होता है तो मुझे पक्षपाती कहा जा सकता है किन्‍तु मै यह मानने को तैयार नही हूँ किसी कि भावना को चोट पहुँचाना ही अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता है। इन ठेकेदारों की स्‍वतंत्रता तब कहॉं चली जाती है तब पैगम्‍बर का कार्टून ही बनाया जाता है जो कि अश्‍लील नही है। क्‍या पैगम्‍बर या इस्‍लाम इतना छुई मुई है कि वह इस छोटी सी घटना को लेकर आहत होता जाता है। क्‍या धर्मिक ठेस लगने और लगाने का ठेका इस्‍लाम ने ही ले रखा है? क्‍या हिन्‍दओं की ध‍ार्मिक भावना नही है? इस अभिव्‍यक्ति के ठेकेदार कहाँ थे जब कार्टून बनाने वाले की हत्‍या का फरमान छेड़ा गया था ?

Sanjay Sharma said...

इस टाइप की परिभाषा केवल जावेद अख्तर ,शबाना आज़मी या कोई अन्य मुस्लिम ही नही गढ़ते , हिंदू सबसे आगे है मकबूल के बचाव मे!  अखबार मे टीवी पर ब्लॉग मे हर जगह नाम से हिंदू दिखने वाला ज्यादा मात्रा मे माँ के नग्नता का समर्थक है .हमे कुछ ख़ास नही इन समर्थक को नंगा करते रहना है बस . सब लाईन पर आ जायेंगे .

भाई आप का कहना बिल्‍कुल सही है, आज जो भी स्थिति देखने को मिलती उससे यही लगता कि आज के दौर में सच्‍चाई का नाम लेने वाला कोई नही रह गया है आज का नेता वोट के कारण तुष्टिकारण की नीति अपनाता है तो पत्रकार भी कहीं हिन्‍दुवादी न कहनाने लगे इसलिये हरी मौलाना टोपी पहने से परहेत नही करते है। नेताओं को यही लगता कि मुसलमनों को अपने से सत्‍ता मिलती है और इसी कारण उनका इस्‍लाम प्रेम जाहिर होता है। इस्‍लाम का सर्मथन धर्मनिपेक्षता कहलाती है, अगर आप हिन्दुत्‍व की बात करों को धर्मनिपेक्षता का उल्‍लंघन होता है। भाई जी आपके बातो मे सच्‍चाई झलकती है आज नंगो का ही दौर जो जितना बड़ा नंगा है वह उतना बड़ा पपुलर कहलाता है। यही कारण है कि आज हर कोई नंगे(नग्न) कहलाने में गर्व और सर्मथन करता है। आज का समाज पत्रकारिता जगत को देख कर यही लगता कि वह नंगा तो नंगा अंधा भी है जो अपनी टीआरपी के लिये भद्दी-भद्दी तस्‍वीरों के प्रसारण करने में हिचकते नही है।

 

आज का वातावरण देखकर लगता है कि आज हिन्दुत्‍व की बात करना सम्‍प्रदायिकता है, और इस्लाम सर्मथन धर्मनिपेक्षता है। यह वातावरण बदलना होगा। इसे मुसलमानों के ठेकेदारों को समझना होगा। यह सम्‍भव नही है क्योकि यह भारत है जहॉं राम पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाया जा सकता है किन्‍तु इस्‍लाम या पैगम्‍बर पर नही। जिससे कि समाज को एक आँख से देखना होगा और मानना होगा कि धर्मिक अपमान राष्‍ट्रीय अपमान है चाहे वह देवी देवता हो या फिर पैगम्‍बर।

अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के मायने

आज एक समाचार पढ़ा लगा कि अभिव्‍यक्ति के स्‍वतंत्रता के मायने क्‍या है ? खबर यह थी कि बेलारूस में इसलाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद साहब का कार्टून प्रकाशित करने वाले एक अखबार के संपादक को जेल भेज दिया गया है।


यह घटना इस्‍लामिक कट्टरवाद की ओर इशारा करता है कि जहॉं जहॉं इस्लाम का प्रभुत्‍व है वहॉं वहॉं अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता तार तार की जाती है चाहे वह भारत हो या पाकिस्‍तान या फिर और कोई राष्‍ट्र क्‍यो न हो?


क्‍या हिन्‍दू धर्म की पूजा प‍द्धति तथा देवी देवताओं को अपमानित करना ही अभिव्‍यक्ति स्‍वतंत्रता है? और अगर इस्‍लाम के खिलाफ कुछ बोला या लिखा जाये तो अभिव्‍यक्‍ित कि स्‍वतंत्रता की धज्जियॉं उड़ा जाती है। किस पैमाने पर तय किया जाता है कि पैगम्‍बर का कार्टून अपराध है और देवी देवताओं की अश्‍लील चित्र विधि सम्‍मत है ? कहॉं चले जाते है अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के ठेकेदार जावेद अख्‍तर, शाबाना आजमी, जब तस्‍लीमा और रूश्‍दी पर आरोप लगाये जाते है। यह भारत है, जहाँ पर इस प्रकार के भेद भाव किये जाते है। यह दशा सो‍चनीय है और इस ओर सोचा जाना चाहिऐ, कि जब इस्‍लाम पर पैगम्‍बर के अपमान पर सजा हो सकती है तो भारत माता और माता सरस्‍वती को आपमान किये जाने पर यह कार्यवाही क्‍यो नही होती है? क्‍या अभिव्‍यक्ति की स्‍वातंत्रता के यही मायने है ?  

चजइ - एग्रीगेटरों का युद्ध और चिट्ठाकार के बीच दूरियों के मध्‍य महाशक्ति समूह का हस्‍तान्‍तरण

कभी कभी लगता है कि हम किस रास्‍ते पर जा रहे है? ये प्रश्‍न आज मेरे मन मै कौध रहे है। इधर मेरी पर‍ीक्षाओं की तिथियॉं आ गई है और इसी 25 से प्रारम्‍भ हो रहा है, तब तक के लिये अवकाश ले रहा हूँ, इस पोस्ट का उद्देश्‍य महाशक्ति समूह के काम परिवर्तन के लिये था किन्‍तु पिछले दिनों मेरे ब्‍लाग पर जो कुछ भी हुआ उसके प्रति स्‍वभावगत लिखना जरूरी था। 

सच कहूँ तो गत दिनों मेरे ब्‍लाग पर हुई वाकयुद्ध सहित कई विषयों से मन आहत हुआ था किन्‍तु किया भी क्‍या जा सकता है। मुझे लगता कि आज हिन्‍दी ब्‍लागिंग मे बहुत कुछ निरूद्देश्‍य से किया जा रहा है।

मुझे लगता है‍ कि यह हिन्‍दी ब्‍लागिंग का सबसे गिरा हुआ दौर है, जिसमें एक दूसरे के टॉंग खीचने का प्रयास किया जाता है। मेरा बहुत कुछ कहना ठीक नही है क्‍योकि आप लोग खुद ही बहुत समझदार हो। क्‍योकि मै जिस दौर में इस क्षेत्र में कदम रखा था वह दौर विवादों के बावजूद प्रेम और सौर्हाद का दौर दौर हुआ करता था किन्‍तु आज के दौर मेरा न कहना ही बहुत कुछ कहना है।

हिन्‍दी ब्‍लागिंग धूरियों पर बटता जा रहा है, और इन धूरियों का ही परिणाम है कि गाहे बागाहे छद्म शीत शुद्ध ब्‍लागिंग में भी शुरू हो जाता है। जहॉं तक ब्‍लागिंग कि बात करूँ तो आज भी कई ब्‍लाग गुमनामी के अधेरे में सभी एग्रीगेटरों पर होने के बाद भी है और कई ऐसे भी ब्‍लाग है जो किसी एग्रीगेटर पर नही है किन्‍तु अच्‍छी पाठक संख्‍या पा रहे है। एग्रीगेटरों को कतई यह नही समझना चाहिऐ कि चिट्ठाकार उनसे अपितु सच्‍चाई यही है कि एग्रीगेटर चिट्ठाकरों से है।

अगर अपने पाठको की बात करूँ तो सभी एग्रीगेटर से कुल पाठक के 40 प्रतिशत भी नही आते है यह जरूर है कि ब्‍लागवाणी सर्वाधिक पाठक भेजता है तो 25 से 30 प्रतिशत बैठता है। किन्‍तु ब्‍लागवाणी से मुझे सर्वाधिक पाठक मिलते है तो इसका यह अर्थ नही है कि चिट्ठाजगत, नारद और हिन्दी ब्‍लाग्स का महत्‍व कम हो रहा है क्‍योकि जो कुछ भी है पाठक वहाँ से भी आते है चाहे प्रतिशत भले ही कम क्‍यो न हो, संख्‍या भले ही कम हो किन्‍तु संख्‍या के महत्‍व को कभी नकारा नही जा  सकता है।

अगर मै बात करूँ तो तीनों ब्‍लाग एग्रीगेटर में अन्‍तर की तो ब्‍लागवाणी अपनी विविधता में एकता के कारण लोकप्रिय है, कुछ समय तक चिट्ठाजगत भी अच्‍छा था किन्‍तु ज्‍यादा अच्‍छा बनने के चक्‍कर में जब से चिटठों का वर्गीकरण किया पाठको की कमी आयी है। रही बात नारद की तो नारद का पहले का स्‍वरूप बेहतर था किन्‍तु यह भी यही बीमारी से ग्रसित हो गया और प्रतीक जी की समयाभाव के कारण हिन्‍दी ब्‍लाग्‍स भी दम तोड रहा है। सभी एग्रीगेटर सहमत थे लिंक एक्‍सचेन्‍ज के किन्‍तु वह  समझौता भी भारतीय राजनीतिक गठबन्‍धन की तरह टूट गया। खैर यह सब लगा रहेगा किन्‍तु जरूर है सम्‍न्‍वय की जो दिखाई ही नही अमल में लाई जानी चाहिऐ। 

मेरी परीक्षाऐं जैसे ही खत्‍म होती है मै पुन: आऊँगा,क्‍योकि वक्‍त बदलने से महौल भी बदले किन्‍तु मुझे इसका भरोसा कम ही है। चूकिं महाशक्ति समूह से मेरा बहुत ही भावात्‍मक नाता है और भी मित्र गण उससे जुडे है इस कारण  मेरे अनुपस्थिति के दौर महाशक्ति समूह की जिम्‍मेदारी श्री मानवेनद्र प्रताप सिंह जी निभाऐगें। महाशक्ति समूह पर किसी भी समस्‍या या बात के लिये अब आप उनसे ही सम्‍पर्क करेगें, किन्‍तु उनसे किसी भी प्रकार से सम्‍पर्क नही होता है तो आप मुझे सूचित कर सकते है।

मै टिप्‍पणी के माडरेशन का विरोधी हूँ कि पिछले दिनों जो कुछ भी मेरे ब्‍लाग पर हुआ उसके चलते मै अपनी अनुपस्थिति तक अपने ब्‍लाग की टिप्‍पड़ी को माडरेशन में रख रहा हूँ, ताकि इस छद्म युद्ध से बचा जा सकें।

चजइ के लिये मेरी पहली और अन्तिम प्रविष्‍टी पोस्‍ट कर रहा हूँ, ताकि यह न हो कि मैने प्रतियोगिता में भाग नही लिया :)

फिर मिलेगें नये समय में नये माहोल में  अभी चलता हूँ ..........

लीगल सेल भारतीय मजदूर संघ उत्तर प्रदेश

    
 

    
 


 


 


 


 

    

    लीगल सेल भारतीय मजदूर संघ उ0प्र0 के तत्वाधान में श्रमविधियों में विसंगतियाँ और उनका समाधान विषय पर आयोजित सेमिनार में आपकी उपस्थित सादर प्रार्थनीय है।


 

भवदीय

लीगल सेल बी.एम.एस. उ.प्र.


 


 

दिनाँक    -    12-जनवरी-2008

उद्धाटन     -    प्रात: 10.00 से 11.00 बजे तक

अल्पाहार    -    प्रात: 11.00 से 11.30 बजे तक    

समापन सत्र    -    प्रात: 11.30 से अपरान्ह 1.00 बजे तक

शीना के कारनामें और भी है

मुझ पर व्‍यक्तिगत आक्षेप करने वाली शीना, हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में 5-6 माह से अपने जलवें दिखाती शीना को आखिर राजकुमार जी की पोस्‍ट में ऐसा क्‍या लिख दिया गया कि वह पॉंच माह के ब्‍लागिंग कैरियर को समाप्‍त कर दिया या फिर और कोई कारण है। जब मैने सोचा कि शीना के बारे मे कुछ जाना जाये तो मै गूगल महाराज की शरण में गया तो एक लिंक यह मिला जहॉं पर शीना के कुछ और लेख भी मौजूद थे, उनके ब्‍लाग से अन्‍यत्र लिखे गये थे अर्थात शीना ने अपने जाल में कईयो फांसा चुकी थी। आखिर शीना ने एक डाक्‍टर का ही वेश के क्‍यो धरा यह भी एक सोच‍नीय विषय है ? क्‍योकि उसे अनुमान था कि अपने पेशे से किया जाने वाला काम पर वह अच्‍छा लिख और लोगों को फॉंस सकती है।

अभी हिन्‍दी ब्‍लाग निदेशिका पर एक शीना जी के बारे में यह पढ़ने को मिला,

हिन्दी चिट्ठाजगत की एगनी आन्ट शीना राय पेशे से एक डॉक्टर हैं। ये चिट्ठा है पाठकों के लिए एक मंच जहाँ वे दिल खोलकर अपनी समस्यायें बता सकते हैं और समाधान पा सकते हैं।

भले ही शीना ने अपना ब्‍लाग डीलिट कर लिया है किन्‍तु उनकी ब्‍लागर प्रोफाईल अभी भी मौजूद है, और वर्तमान में एक ब्‍लाग पर वो लिख रही है।

शीना की सलाह

About Me

नमस्कार मेरा नाम शीना राय हैं. पेशे से मैं एक डॉक्टर हूँ. पेश हैं आप के लिए एक मंच जहाँ आप दिल खोलकर अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं.किसी भी प्रकार की समस्या के लिए मुझे shinaray@gmail.com पर मेल करे

मै शीना जी के बहुत पीछे नही पढ़ना चाहूँगा, जो गलत था वो चला गया किन्‍तु आज भी शीना के पन्‍ने मौजूँद है जो खोज का विषय हो सकता है। आज विभिन्‍न मुद्दों पर शीना की टिप्‍पणी मौजूद है वह दर्शाती है कि उनका ब्‍लागिंग में काफी दखल था।

इधर एक दो बातें मेरे ब्‍लाग पर और देखने को मिली कि किसी ने विपुल जी के नाम से मेरे ब्‍लाग पर वाहियात टिप्‍पणी की थी, और जब मैने उसे देखा तो मेरा भी माथा ठिनका और मै उसे डिलीट करने के लिये अग्रसर हो ही रहा था कि अचानक मेरे फोन पर एक घन्‍टी आई और कहा गया कि मै विपुल जैन बोल रहा हूँ, और उन्‍होने अपनी बात रखी और मैने भी अपनी बात रखी कि अगर आपका फोन न भी आता तो मै उसे तुरंत हटाने ही वाला था। विस्‍तृत लम्‍बी चर्चा के बाद मैने अपने विवेकानुसार टिप्‍पणी हटा दी जो हटाने योग्‍य थी।

इधर संजय भाई कि भी एक टिप्‍पणी दो एग्रीगेटरों की जंग को लेकर थी और उनका भी कहना था कि मेरी पहली टिप्‍पणी का उद्देश्‍य खत्‍म हो गया है उसे भी हटा दिया जाना चाहिए। मै एक बात स्‍पष्‍ट कर देना चाहता हूँ कि मै अपने ब्‍लाग को किसी वार का अड्डा नही बनने दूँगा। चाहे यह दो एग्रीगेटरों के बीच युद्ध हो या चार किन्‍तु रोटियॉं दोनो और चारों के बीच तीसरा और पॉंचवा खाता है। खैर यह विषय अगल है।

मै किसी को भी चाहे टिप्‍पणी या लेख या किसी और माध्‍यम से अपने ब्‍लाग को जंग का अखाड़ा नही बनाने दूँगा।

जय श्रीराम

महाशक्ति से टकराने वाली शीना ने अपना ब्‍लाग डिलीट किया

 

मैने अपने पूर्व के लेख प्रयाग में महाशक्ति-भड़ास भेंटवार्ता में कहा था कि महाशक्ति हो कर लिखने के लिये जिगरा होने की जरूरत होती है। मैने अपने लेख तो क्‍या कंडोम सच्‍चर जी के काम आयेगें ? पर दो चार बातें क्‍या लिखी, एक शीना राय नामक भद्र महिला ने मेरे ऊपर बमक पड़ी और तो और जब मेरे मित्र राजकुमार ने व्‍यक्तिगत आक्षेप को लेकर व्‍यक्तिगत आक्षेप कितने सही ? लिखा तो उक्‍त भद्र महिला जो मेरे दादा परदादा ही हिस्‍ट्री जानने को उत्‍सुक थी, अपने ब्‍लाग शीना की सलाह  का ही इतिहास गायब हो गया। आखिर यह सब क्‍या है? अगर मुझे पता होता कि बेमन से  लिखी पोस्‍ट का इतना असर होता है कि एक ब्‍लाग डिलीट होना पड़े तो मै ऐसा कभी न करता। 

शीना नाम से चाहे जो भी हो किन्‍तु एक ओर तो डाक्‍टर के वेश में एक बहुरूपिया नारी बनकर व्‍यक्तिगत आक्षेप लगाना कहॉं की बात है ? मैं नेट पर करीब 1.5 साल से लिख रहा हूँ, इस तरह की व्‍यक्तिगत आक्षेप मैने कभी किसी पर नही लगाये, जब तक की मुझे विवाश नही किया है, किन्‍तु अपने संज्ञान में मैने कभी भी ऐसा नही किया। शीना की सलाह मैने करीब 3-4 माह पहले देखा था और सोचा था कि कभी वक्‍त मिलने पर सलाह लूँगा, अच्‍छा हुआ कि मै बच गया नही तो बुरके जनाना की जगह मर्दाना पठ्ठा मिलता। मुझे तो हंसी आ रही है कि जो ब्‍लगार भाई शीना मैडम से चैगिंग किये होगे, और उनके बीच हुऐ डेट के वायदो का क्‍या होगा? :) कहीं मामला सोनू निगम के कास्टिंग काउच वाला न हो जाये :)  खैर बहुत मजाक हो गया अब सीरियस बात करते है।

इधर एक और अच्‍छी बात देखने के मिली की महाशक्ति समूह में राजकुमार जी के सहासिक लेख के द्वारा एक शीना की सलाह नामक फर्जी ब्‍लाग बन्‍द हो गया, और इसके लिये महाशक्ति समूह और मित्रता की मूर्ति राजकुमार दोनो बधाई के पात्र है। यह सब हो गया किन्‍तु बात अभी खत्‍म नही हो रही है, आखिर शीना थी कौन जो अपना सीना चौड़ा कर ब्‍लागिंग में जहर घोलने का काम कर रही थी। निश्चित रूप से हिन्‍दी ब्‍लाग्‍स में ऐसे लोगों की कमी नही जो द्वेष भावना रखते है, जहॉं तक मै जानता हूँ कि मेरे व्‍यक्तिगत व्‍य‍वाहार से शायद ही मेरी कोई कभी निंदा किया हो, हॉं यह जरूर है कि लेखन के कारण कारण काफी निन्‍दा सहनी पड़ी है। पता नही शीना जी को मुझसे क्‍या बैर था कि मेरे हाथों एक सिखड़ी का वध हुआ! अगर शीना जी वास्‍तविकता में कोई होती तो अपना ब्‍लाग खत्‍म करने के बाजय वह पोस्‍ट हटाती, किन्‍तु मन में चोर होने पर सही बात सामने आ ही जाती है और वही हुआ भी कि फर्जी महिला के रूप में ब्‍लागिंग कर रही शीना को जाना पड़ा।

मेरे पिछले लेख में एक अनाम टिप्‍पणी आई थी और एक बन्‍धु का नामोल्‍लेख किया किन्‍तु मै उसे सही नही मानता हूँ  क्‍योकि इतना प्रतिष्ठित व्‍यक्ति यह काम नही कर सकते है। किन्‍तु अनाम भाई इतना तो जरूर सही है कि कि जो कोई भी शीना थी वह एक सक्रिय ब्‍लागर था। यह काम उसी का हो सकता है जिसें विवादों में रहना पंसद हो और मुझसे चिड़ हो। कोई भी नारी कम से कम विवादों में रहने के लिये ब्‍लागिंग नही ही करेगी। हो न हो कि कोई बिगडैल चिट्ठाकार ही है जो इस तरह का अर्नगल काम कर रहा था। 

वैसे शीना ने जो मुझसे जो सलाह मॉंगी थी वह लेने से पहले चली गई, अब तो मनमोहन से कहना होगा कि एक सच्‍चर जी से जॉंच करवाये कि शीना कौन थी ?

तो क्‍या कंडोम सच्‍चर जी के काम आयेगें ?

भारत की एक बड़ी इस्लामी संस्था ने फतवा दिया है कि अगर वर्तमान बच्चे के लालन-पालन में अगले बच्चे के जन्म से दिक्कत होने या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पत्नी के फिर से गर्भवती होने से समस्या की आशंका हो तो पति पत्नी द्वारा कंडोम सहित परिवार नियोजन के अन्य उपाय करना शरीयत सम्मत है।



देवबंद दारूल उलूम से एक व्यक्ति ने सवाल किया था कि क्या पत्नी के साथ सेक्स में कंडोम का प्रयोग करने की शरीयत में अनुमति है।इसके जवाब में जारी फतवे में कहा गया कि कम आय और अधिक बच्चे के डर या केवल मजे के लिए कंडोम आदि का इस्तेमाल जायज नहीं है, लेकिन अगर अगला बच्चा होने से वर्तमान बच्चे के लालन-पालन में कठिनाई आए या पत्नी की सेहत ऐसी हो कि एक और गर्भ धारण करने में उसे परेशानी उठानी पड़े तो गर्भ निरोधक उपाय करने की शरीयत में मनाही नहीं है। बच्‍चे खुदा की मर्जी से पैदा होते है और वही उसका पालन पोषण भी करेगा।



मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करने वाली सच्चर समिति ने इस अवधारणा को गलत बताया है कि भारत में मुस्लिम समुदाय परिवार नियोजन से परहेज करता है। इसकी रिपोर्ट में बताया गया कि मुस्लिम समाज का लगभग 40 प्रतिशत परिवार नियोजन के लिए आधुनिक गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल करता है। इसके अनुसार दो करोड़ से अधिक मुस्लिम दंपत्ति गर्भ निरोधक उपाय प्रयोग में ला रहे हैं।



फतवे में कहा गया है कि कंडोम या अन्य गर्भ निरोधक तीन कारणों से इस्तेमाल होते हैं। एक कारण कम आय है। लोग इस डर के कारण कंडोम आदि का इस्तेमाल करने लगते हैं कि कम आमदनी और बच्चे अधिक होने से उनका लालण पोषण कैसे होगा। इसमें कहा गया कि इस सोच के तहत कंडोम आदि का इस्तेमाल करने की शरीयत में इजाजत नहीं है क्योंकि यह सोच इस आस्था में कमजोरी की निशानी है कि सबका पालनहार अल्लाह है। ऐसा सोचने वाला अल्लाह की जगह खुद को पालनहार मान लेता है, जो कुफ्र और हराम है।



हालाँकि मिस्र के विश्वविख्यात इस्लामी विद्वान शेख अल शाराबास्सी दारूल उलूम के इस मत से सहमत नहीं है। उनका कहना है अगर कोई पति यह समझता है कि वह और अधिक बच्चों के लालन-पालन का भार वहन नहीं कर सकता है, तो उसे गर्भ निरोधक उपाय करने का पूरा अधिकार है। भारत के बाहर की सोच यह है किन्‍तु भारतीय मुसलमान कूपमंडूप ही रहना चाहते है किन्‍तु सच्‍चर उन्‍हे उठा के ही रहेगें पर कब तक ?



फतवे के अनुसार कंडोम उपयोग की दूसरी वजह सेक्स का आनंद उठाना है, जो गलत है। इसमें कहा गया कि पत्नी के साथ सेक्स के आनंद में कोई बाधा नहीं आने देने के इरादे से गर्भ धारण से बचने के लिए कंडोम आदि का इस्तेमाल मकरूह (अवांछित) है। ऐसा करना निकाह के उद्देश्य के विरुद्ध है।



दारूल उलूम ने कहा कि कंडोम आदि के प्रयोग का तीसरा कारण बच्चे या पत्नी का स्वास्थ्य कारण हैं। स्वास्थ्य कारणों से एक प्रसूति के बाद अगर अगले बच्चे का जन्म वर्तमान बच्चे के लालन-पोषण में बाधा बने या पत्नी एक और गर्भ धारण करने की हालत में नहीं हो तो शरीयत गर्भ निरोधक उपाय करने की पूरी अनुमति देता है।




उपरोक्‍त रिपोर्ट अभी मैने वेवदुनिया पर पढ़ी और पढ़ने के बाद लगा कि जब तक खुदा बच्‍चे पैदा करेगा, तब तक सच्‍चर क्‍या मनमोहन और सोनिया भी लग जाये तो मुसलमानों का उत्‍थान नही हो सकता। आरक्षण तो एक छलावा है क्‍योकि आरक्षण से किसी का हक जाता है किन्‍तु शरीयत का उल्‍लंघन नही होता है। जब कंडोम ओर गर्भनिरोधक गोलिया शरीयत के खिलाफ है तो कंडोम तो सच्‍चर जी के फुलाने के काम काम आ जायेगें और गोलिया रक्षामंत्री एंटनी के वो सेना में भिजवा देगें, किन्‍तु मुसलमानों की शरीयत पर आँच नही आने देगें।

प्रयाग में महाशक्ति-भड़ास भेंटवार्ता



एक दिन अचानक मेरे आरकुट के बोर्ड पर भड़ासाध्‍यक्ष श्री यशवंत जी का मित्र निवेदन और साथ में एक संदेश मिला कि मै 31 को आपके प्रयाग में रहूँगा। क्‍या आपसे मिलना हो सकेगा ? उनके मित्रता को स्‍वीकार करने के बाद वे मेरे जीटॉंक में भी जुड गये थे उनसे परस्‍पर वार्ता हुई और 31 को मिलने का कार्यक्रम तय हुआ।

31 की सुबह मैने करीब 8 बजे के आस पास मैने उन्‍हे फोन किया, और उन्‍होने मुझे बताया कि वे हालैन्‍ड हाल में ठहरे हुऐ है, और मैने उन्‍हे करीब 11-12 बजे तक हालैन्‍ड हाल पहुँचने का वायदा किया। अक्‍सर जब मै किसी घर से बाहर निकलता हूँ तो दो चार काम लेकर ही निकलता हूँ। तो मै अपने साथ टेलीफोन आदि के बिल जमा करने का काम लेकर साथ चला तथा साथ महाशक्ति समूह के दो चिट्ठाकार श्री देवेन्‍द्र प्रताप सिंह व श्री मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह को भी लेकर गया।

करीब 12.30 बजे के आस-पास हम हालैन्‍ड हाँल पहुँच गये थे तथा कमरा नम्‍बर 29 भी हम बेधड़क पहुँच गये, वहॉं पर देखा तो श्री यशवंत जी ठन्‍ड में रजाई का आंनद ले रहे थे, और हम सब के प‍हुँचने से जो रजाई गर्दन तक तनी थी और भड़ासाध्‍यक्ष के पैरों तक आ गई थी और वे 180 अंश का कोण बना रहे थे वह 90 अंश में बदल गया था। कमरे में पहुँचने पर गर्म जोशी के साथ हाथ मिलावा मिलाई हुई साथ ही साथ परिचय की औपचारिकता भी सम्‍पन्‍न हुई। परिचय कि औपच‍ारिकता इसलिये क्‍योकि मेरे साथ दो अन्‍य ब्‍लागर थे उनसे न तो यशवंत जी परिचित थे नही वे दो दोनों उनसे ही।

सर्वप्रथम बात की शुरूवात मैने ही की और पूछा कि आप को मेरे बारे में कैसे जानकारी मिली तो उनका कहना था कि मैने अपने ईमेल के सभी एड्रेसों को एक साथ ही आरकुट मे जोडने के लिये आदेश दिया और आप भी जुड गये। और फिर उन्‍होने मेरे आरकुट प्रोफाइल और मित्रों की लिस्‍ट की तारीफ की, किन्‍तु मैने बाताया कि मै आरकुट को कम पंसद करता हूँ किन्‍तु कुछ मित्र ऐसे है जो मेरे विचारों से प्रभावित हो कर अपने आप ही निवेदन कर देते है और मै सर्वप्रथम यह देखकर कि उनका बैग्राउन्‍ड कैसा है ? यह देख कर स्‍वीकार कर लेता हूँ। बामु‍श्किल से मै कभी स्‍क्रैप करता हूँ।

फिर धीरे धीरे चर्चा ब्‍लाग की ओर भी आई और उन्‍होने मुझसे मेरे ब्‍लाग के हि्ट्स जानना चाहा और मैने उन्‍हे बताया, फिर वे यह भी पूछा कि इस समय सबसे अधिक हिट्स वाला ब्‍लाग कौन है मै इस प्रश्‍न का उत्‍तर देने मे असमर्थ रहा तथा दो चार ब्‍लागों के नाम उनके सम्‍मुख रखा। फिर उनका प्रश्‍न था कि आप ब्‍लागिंग में कब से है तो उनके प्रश्‍न का उत्तर भी मैने दिया। और उन्‍होने यह भी पूछा कि महाशक्ति का उद्देश्‍य, आगे का भविष्‍य और इसके पीछे कौन लोग है? मैने अपने स्‍तर तक उनके इस प्रश्‍न का उत्‍तर भी देने की कोशिस की, कि महाशक्ति का उद्देश्‍य राष्‍ट्रवादी विचारधारा के लोगों को एकत्र करने के साथ-साथ नये लोगों को मंच प्रदान करना है, हम इस पर हर कुछ छापने को तैयार है बशर्ते वह राष्‍ट्रवाद विरोधी व कामुक रचनाऐं न हो। कोई चिट्ठाकर चाहे तो अपने ब्‍लाग की प्रकाशित समग्री भी महाशक्ति समूह पर प्रकाशित कर सकता है। मेरे ब्‍लाग लेखन को लेकर भी उन्‍होने काफी उत्सुकता से पूछा और आगे के भविष्‍य पर भी मेरी राय जाननी चाही तो मेरा सिर्फ यही कहना था कि मेरा कैरियर और पढ़ाई प्रथम है न कि मेरा ब्‍लाग लेखन और मै अपने प्रथम‍िक चीज के लिये किसी भी पल इसे छोड़ने में गुरेज नही करूँगा, रही बात भविष्‍य के तो प्रमेन्‍द्र के लेखन का यही अन्‍त नही है, यह वह काम है जो मै अनूप शुक्‍ला, समीर लाल और ज्ञानदत्‍त पाण्‍डेय जी की उम्र में शुरूवात पुन: कर सकता हूँ।

मेरे मन मे भी कुछ प्रश्‍न थे जो मैने उनसे पूछे कि भड़ास क्‍यो तो उनका उत्‍तर था कि जो बात न कही जा सके उसको समाने लाना। फिर मैने कहा कि मै आपके भड़ास पर शुरूवात में गया फिर कभी जाने का नौबत ही नही आयी क्‍योकि उसकी भाषा इतनी आपत्ति जनक होती है कि पढ़ने की इच्‍छा नही करती है और उन्‍हेने भी इसे स्‍वीकार किया। फिर उन्‍होने यह भी बताया कि भड़ास पर 100 से अधिक ब्‍लागर सदस्‍य बन चुके है।

ब्लागिंग के भविष्‍य पर उनका कहना था कि आगे ऐसा दौर आयेगा कि बड़ी बड़ी कम्‍पनी या बेवसाईट इस क्षेत्र में आजायेगी तो आप ब्‍लागरों का अस्तित्‍व समाप्‍त हो सकता है पर मेरा कहना था कि जो भी दौर आयेगा वह आप ब्‍लागरों का जगह नही ले सकेगी क्‍योकि जो अनूप शुक्‍ल या उड़नतश्‍तरी या महाशक्ति से प्रभावित है वह इन्‍ेह कही न कही से जरूर पढ़ेगा।

उनका कहना था कि आने वाले दो तीन सालों में हिनदी ब्‍लाग के पाठकों की संख्‍या 10000 हजार तक पहुँच सकती है तो मेरी यह राय थी कि हो सकता है कि एक दो स्‍थपित ब्‍लाग पर यह हो किन्‍तु सभी से यह आशा रखना बेमानी होगा। यशवंत जी के साथ हिन्‍दी ब्‍लाग के भविष्‍य के और सम्‍भवनाओं पर भी बात हुई और एक विस्‍तृत योजना साकार करने पर विचार हुआ।

इस चर्चा के दौरान मेरे और यशवंत जी के मध्‍य कुछ ब्‍लागरों के नाम भी लिये गये जो किसी न किसी रूप मे हमने उन्‍हे याद किया। वो निम्‍न है- श्री अरूण अरोड़ा, श्री रवि रतलामी, अनूप शुक्‍ला, श्री समीर लाल, श्री शशि सिंह महाशक्ति के कुछ सदस्‍य और भड़ास के कुछ सदस्‍य तथा अविनाश और रवीश जी जैसे पत्रकारों का भी जिक्र हुआ। पत्रकारों के जिक्र आने पर मेरी यह भी बात सामने आई कि मेरी हिन्‍दी ब्‍लाग के किसी पत्रकार के दृष्टिकोण से कभी पटी नही और मै सदैव उनके विरोध में रहा, भले ही वह विरोध मूक रहा हों। इस पर भी उन्‍होने स्‍वयं पत्रकार होने के नाते पत्रकारिता की कुछ अन्‍दर की बात भी बताई।

इस भेंट वार्ता का दूसरा पहलू महाशक्ति समूह के चिट्ठाकार अधिवक्‍ता श्री देवेन्‍द्र जी और यशवंत जी के मध्‍य काफी रोचक चर्चाऐं माक्‍सर्वाद, राष्‍ट्रवाद व संघ के विषय में हुऐ जो किसी के भी ध्‍यान को आकर्षित कर सकती थी। कुछ विषयों पर श्री मानवेन्‍द्र जी भी जरूर बोले पर वह वाद को सुनने में ज्‍यादा रहें।

लगभग दो डेढ़ घन्‍टे के मुलाकात के दौरान हम लोगों ने चाय पीकर, शाम की चाय के लिये यशवंत जी को आंमत्रित करके चलते बने। किसी कारण वश वह शाम को मेरे घर की चाय पीने नही आ सके।
एक प्रका‍र साल की अन्तिम ब्‍लागर मीट जो दो विभिन्‍न विचारधारा वाले ब्‍लागों की मीट साबित हुई जो बिना किसी मन मुटाव के समाप्‍त हो गई।
चलते चलते - महाशक्ति को लेकर लोगों की धारण मेरी कदकाठी से पहलवान की होती है और यशवंत जी के मन में भी यही रही जिसका जिक्र उन्‍हेने अपने ब्‍लाग पर किया था। किन्‍तु महाशक्ति हो कर लिखने के लिये कद काठी से बलिष्‍ठ होने के बजाय जिगरा होने की जरूरत है जो मेरे पास है, यही कारण है कि मै किसी भी विषय पर अपनी स्‍पष्‍ट राय रखता हूँ चाहे जनमत मेरे विरोध में क्‍यो न हो।