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महाशक्ति, ऐडसेंस और 163.83 डालर

अगरस्‍त 2007 में श्री रामचन्‍द्र मिश्र जी से मिलना हुआ था तो उन्‍होने मुझे बताया था कि उनके अब तक 70 से 75 डालर हो गये है। फिर उनके ही ब्‍लाग पर सू‍चना मिली की उनके 100 डालर अक्‍टूबर 2007 में पूरे हो गये थे और करीब 111 डालर का पहला चेक उन्‍हे प्राप्‍त हुआ था। इस बार होली पर श्री रामचन्‍द्र भाई साहब से पुन: मिलना हुआ तो जानकारी प्राप्‍त हुई कि उनके इसी माह पुन: शतक लगाने वालें है (सम्‍भवत: अब तक लग भी गया हो)

इस बाबत जब मै पहली बार राम चन्‍द्र भाई साहब से अगरस्‍त 2007 में पहली बार मिला था, तो उन्‍हे तो मैने उन्‍हे पहली बार बताया था कि  नवम्‍बर 2006 से अगस्‍त 2007 तक 35 डालर जुटे है। उनसे फिर मुलाकात हुई और उन्‍होने अपनी प्रति बताई और मेरी प्रगति के बारे में पूछा। मैने उन्‍हे बताया कि  मुझे फरवरी 2007  के पहले हफ्ते तक लगभग 86 डालर जुड चुकें है, और उसके बाद कि स्थिति मुझे ज्ञात नही है क्‍योकि यह एडसेंस एकाउन्‍ट में खाते से संचालित नही होता है यह मेरे बड़े भइया के खाते से चलता है, मेरा पहला खाता किन्‍्ही कारणों से बंद हो चुका है :)

रात्रि करीब 10.15 तक मै उनके घर से वापस आया और भइया से एडसेंस खाते के बारे में जानना चाहा। उन्‍होने कहा कि रात्रि काफी हो गई है कल देख लेना। पर मै कहाँ मानने वाला था और कम्‍प्‍युटर चालू कर दिया। भइया का खाता खुलते ही हमें गूगल की तरफ से होली का तौहफा मिल गया मै 86 डालर से सीधे 145 डालर पर पहुँच गया था। निश्चित रूप से होली पर इससे बड़ा उपहार क्‍या हो सकता था?

महीना खत्‍म होने के साथ-साथ (अभी 2 दिन बाकी है) 164 के आस पास पहुँच गया हूँ, सम्‍भव है कि अगले दो दिनों में 170 डालर तक पहुँच सकता है। किन्‍तु अभी तक यह कागजी खाना पूर्ति है क्‍योकि रामचन्‍द्र भाई साहब से पता चला कि 50 डालर के बाद अभी कोई पिन आना है वह अभी तक नही आया है। खैर देस सबेर आ जायेगा। :) 

 

अभी इतना ही शेष फिर......

अफजल के नाम पर समाज सेविका का असली चेहरा

भारत में डायनों की कमी नही है, जो समय समय पर अपना पिचासिनी रूप दिखाने के तत्‍पर रहती है। यह जानी मानी समाज सेविका मेधा पाटेकर है जो दिल्‍ली में अफजल के समर्थन में घरने पर बैठी है।

ये भारत के लिये पूतना से कम नही है जो कृष्‍ण को मारने के लिये सुन्‍दर स्‍त्री का रूप धरती है किन्‍तु सत्‍य के आये असली चेहरा आ ही जाता है। आज अफजल के मामले में मेधा की असली चेहरा सामने आ ही गया है। जो समाज सेविका के नाम पर आंतकवादियों के साथ दे रही है।

(यह चित्र अक्‍टूबर 2006 का है)

 

और कांग्रेसी भड़क उठे...

गुजराज चुनाव के समय आरकुट की कांग्रेस कम्‍यूनिटी में बहुत उत्‍साह था, लोग कह रहे थे कि दिनिशॉं पटेल ये कर देगे वो कर देगे, और इसी पर मैने सच्‍चाई समाने रख दी कि ''दिनिशॉं भी जीत गये और काग्रेस भी जीत गये और अब चलों खुशी भी मना लो किन्‍तु चुनाव परिणाम के बाद सच्‍चाई सामने आ जायेगी, पता नही खुशी मनाने को मिले भी नही।





मेरा सिर्फ इतना ही कहना था कि कांग्रेसियों ने न जाने क्‍या क्‍या उपाधियॉं दे कर कांग्रेस की कम्‍यूनिटी से बाहर निकल दिया, आज फिर सोचा चलों। आरकुट पर कांग्रेस की खबर ले लूँ, पर पर मैसेज मिला कि मै बैन हूँ। :) मेरे पास हँसने के सिवाय कुछ नही था कि ये काग्रेसी इतने छुई मुई क्‍यो होते है? पता नही आज कल सब मेरे बैन के पीछे ही क्‍यो पढ़े है ?






संघ को इतना कोसते है किन्‍तु जब पर आती है तो मेंढ़क की तरह उछल पड़ते है।

कन्नूर: कम्युनिस्ट पार्टी का रक्तरंजित इतिहास

उत्तर केरल के कन्नूर जिले में सी.पी.एम. के कार्यकर्ताओ द्वारा 05-03-2008 के बाद पुन: शुरु किये गये आक्रमणों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे पांच कार्यकर्ता मारे गये हैं तथा दर्जनों गम्भीर रुप से घायल हुये हैं। इस हिंसा में 40 से अधिक स्वयंसेवक के घर को नष्ट कर दिये गये हैं।
यह माना जाता है कि केरल की कम्युनिस्ट पार्टी का गठन कन्नूर जिले के पिनाराई नामक स्थान पर हुआ था और पार्टी इस जिले को अपना गढ़ मानती है। इस जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य 1943 में शुरु हुआ और 25 वर्ष से अधिक समय तक शान्तिपूर्ण ढँग से चला । इस दैरान सी.पी.एम. के कई कार्यकर्ता संघ के प्रति आकर्षित हुये और बडी़ संख्या में उसमें शामिल हुये। संघ की बढती हुई शक्ति को सी.पी.एम. सहन नहीं कर सकी और 1969 से हत्या की राजनीति पर उतर आई।
एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी श्री रामकृष्णन थलसैरी शाखा के मुख्य शिक्षक थे उसने कम्युनिस्टों के आतंक का हिम्म्त से मुकाबला किया और थलसैरी तथा आस-पास के क्षेत्र में कई शाखायें खडी़ कीं। वह कम्युनिस्टों का पहला शिकार बना और 1969 में उसकी निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी गयी। वर्तमान में सी.पी.एम. पार्टी के राज्य सचिव श्री पिनराई विजयन, जो इसी जिले के निवासी हैं, इस हत्या के मुख्या अभित्युक्तों में से एक हैं। वर्तमान गृहमंत्री कुडियेरी बालकृष्णन जो कन्नूर जिले के ही निवासी हैं के. सतीशन नामक, दूसरे स्वयंसेवक की हत्या में अभियुक्त थे।
अब तक अकेले इस जिले में 60 से अधिक स्वयंसेवक सी.पी.एम. के हाथों मारे गये हैं। यहाँ तक कि वृद्ध महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। 22 मई 2002 को एक स्वयंसेवक श्री उत्त्मन जिसकी हत्या सी.पी.एम. ने पहले दिन की थी, उसकी अंत्येष्टि में भाग लेकर जीप से वापस आ रहीं श्रीमती अम्मू अम्मा (72 वर्ष ) की सी.पी.एम कार्यकर्ताओं द्वारा बम फेंककर हत्या कर दी गयी। 

 

लेखक - श्री चंदन सिंह

रोजर फेडरर कहीं ब्योर्न बोर्ग के पुर्नजन्‍म तो नहीं

दुनिया के नंबर एक टेनिस (Tennis) खिलाड़ी स्विट्ज़रलैंड के रोजर फ़ेडरर (Roger Federer) ने लगातार पाँचवीं बार विंबलडन का ख़िताब जीतकर महान ब्योर्न बोर्ग (Bjorn Borg) के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। अब इसे फेडरर की महानता की कहा जायेगा या ब्योर्न बोर्ग क्‍योकि दोनो अपने आप में महान है। नीचे कुछ चित्र है जो यह बताते है कि कि इस जन्‍म में भी अवतार हो सकता है। ब्योर्न बोर्ग आज फेडरर को देख निश्‍चित रूप से अपने पिछले दिन याद कर रहे होगा।

ब्योर्न बोर्ग के बारे कहा जाता है कि 1978, 79, 80 में बोर्ग पेरिस के 'क्ले कोर्ट' पर लगातार खिताब (फ्रेंच) जीतने में जुटे हुए थे, उन्हीं वर्षों में वे एक अलग सतह अर्थात लंदन के 'ग्रास कोर्ट' पर भी खिताब जीत रहे थे और वह भी लगातार। जी हाँ 1978, 79 व 80 में बोर्ग ने विम्बलडन खिताब भी जीतकर एक विशिष्ट कीर्तिमान बनाया था।

अपने विजय अभियान में बोर्ग ने यदि फ्रेंच ओपन में जी. विलास (78), वी. पेक्की (79) और जेरुलाइटिस (80) को हराया था तो इन्हीं तीन वर्षों में ग्रास कोर्ट के मास्टर माने जाने वाले जिमी कोनोर्स, रास्को टेनर एवं जॉन मेकनरो को विम्बलडन में हराया था।
दो विभिन्न सतहों पर खिताबी हैट्रिक बनाना आसान बात नहीं थी किंतु महान बोर्ग ने इसे संभव बनाया था। जब ग्रास कोर्ट के मास्टर पीट सैम्प्रास एक अदद 'फ्रेंच खिताब' के लिए तरसते रहे हों अथवा 'क्ले मास्टर' इवान लेंडल ' विम्बलडन' की आशा में ही मुरझा गए हों, वहाँ बोर्ग की दोनों में हैट्रिक उन्हें विशिष्ट खिलाड़ी ही बनाती है।

फेडरर के दिल में आज सिर्फ यही कसक होगी कि वह आप नही जीत पाये है तो सिर्फ फ्रेंच ओपन कहते है कि यह लाल मिट्टी हर किसी को नही सुहाती है, यही कारण है कि आज तक कई दिग्‍गजो को यह खिताब नही जीत पाने का मलाल है।

नीचे चित्रों में ब्योर्न बोर्ग और रोजर फेडरर को एक साथ देखिए।

 

 

इस होली जा रहा हूँ श्रीमती जी खोजने

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अभी कुछ देर पूर्व एक पोस्‍ट पढ़ी काफी अच्‍छा लगा किन्‍तु एक बात की झेप लग रही थी। कि अनूप जी ने भी अपनी श्रीमती जी को चित्र दिखाकर हँसा लिये और ज्ञान जी भी, किन्‍तु बचे तो हम। अब खुद ही सोचिऐ कि अपने उपर खुद ही हँसे तो क्‍या हँसे? या फिर कह सकते है कि देख निक्कमें को कि इसके साथ कोई हूँसने वाला भी नही है। काश हमारे पास भी एक श्रीमती होती तो वो भी हमारे चित्र को देख कर हँसी कि हम भी ब्‍लागगीरी में कितने ऊँचे स्‍थान पर पहुँच गये है। अब अपने कारनामें हम बताये तो किसे बताऐं और दिखकर हँसाये तो किसे हँसाऐं?

खैर इस होली में एक श्रीमती खोजने जा रहा हूँ ताकि अगली बार होली में हँसने वाला साथ हो :)

 

चलते चलते ....

 

मै सच बोल रहा था,

यार मुझे नशे में समझ रहे थे।

वो भूल जाते है कि

सच्‍चाई ज्‍यादातर नशे में निकलती है।

नशे में होने पर,

आपनी बीवी भाभी जी और

यार की बीवी जी अपनी बीवी नज़र आती है।

मै सच बोल रहा था,

यार मुझे नशे में समझ थे।

 

आप सभी को होली की बहुत बहुत सुभकामानाऍं।

 

चित्र साभार तरकश डाट काम

होली खेलनी हो तो ''केरल'' आईये

कल के चित्र लेख (चेतावनी - कमजोर दिल इन चित्रों का न देखे) नीरज भाई कुछ सूत्रों की मॉंग की थी, उन्‍हे दे रहा हूँ, किन्‍तु कहा जा सकता है कि यह हिन्‍दूवादियों वेवसाईटों का काम है पर वास्‍तविकता यही है कि आज की सेक्‍यूलर मीडिया का इन घटनाओं से कोई सरोकार नही है। क्‍योकि वामपंथ का यह रूप आज से नही रहा है। आज से करीब 7 -8 वर्ष पहले त्रिपुरा में भी अनेको संघ के कार्यकर्ताओं को मार दिया गया, तब पर भी यह समाचार राष्‍ट्रीय स्‍तर तक नही पहुँच पाई और आज भी हिन्‍दुओं का नरसंहार अपने आपको राष्‍ट्रीय खबर के रूप में खोज रहा है। एक ईसाई पादरी की हत्‍या पर पूरा  भारतीय मीडिया खुशी से झूम उठता है किन्‍तु हिन्‍दुओं का कत्‍लेआम खबर नही बन पाती है। यही कारण है कि ये लोगों को सच्‍चाई का पता नही चल पाता है।

हिन्‍दूओं का खून-खून नही होता है, इसी लिये आज भारत में बहुसंख्‍यक होने के बाद भी दोयम दर्जे का नगरिक है। और किसी भी देश में दोयदर्जे के नागरिकों की कोई कद्र नही होती है। हिन्‍दुओं के साथ खून की होली तब खेली जायेगी तब तक कि हिन्‍दु अपने आपको दोयम दर्जे से अलग नही हो जाते है।

 

कल चित्र लेख के कुछ सूत्र

haindavakeralam

hindujagruti

 

List of murdered Hindu Leaders :

  • Late Sukhanand Shetty, (32)  BJP leader, Manglur, Karnataka
  • Late Kumar Pandey, (38) Hindu Munnani, Tenkashi, Tamilnadu
  • Late Sunil Joshi, (45), RSS, Devas, Madhya Pradesh
  • Shri. Kumar Pandey, Hindu Munnani, Tamilnadu
  • Shri. Ravi, RSS, Thirur, Kerala
  • Advt. P. P. Valsraj Kurup, RSS, Kerala

चेतावनी - कमजोर दिल इन चित्रों का न देखे

कन्‍नूर, केरल में माकपा के कार्यकर्ताओं का संघ स्‍वयंसेवको पर कहर, इस राष्‍ट्रीय शर्मनाक घटना की निन्‍दा की जानी चाहिऐ, किन्‍तु सेक्‍यूलर नेताओं और सेक्‍यूलर मीडिया को माकपा का यह कुकृत्‍य नही दिखेगा। क्‍योकि ऐसे लोगों को गोधरा नही दिखता सिर्फ गुजरात दिखता है। 


सुभाषित

दातव्‍यमिति यद्दानं दीयतेSनुपकारिणे।

देश काले च पात्रे च तद्दानं सात्विक स्‍मृतम्।।  श्री म.भ.गीता 17/20

भावार्थ -

दान देना ही कर्त्तव्‍य है, ऐसे भाव से जो दान देश तथा काल और पात्र के प्राप्‍त होने पर अउपकार न करने वाले के प्रति दिया जाता है, वह दान सा‍त्विक कहा गया है।

शुभाषित, अमृत वचन

मैथली जी आप बधाई के पात्र है

ब्‍लागवाणी आज जनवाणी बन कर उभरा है, यही कारण है कि आज ब्‍लागवाणी के आगे अन्‍य एग्रीगेटरों 20 साबित हो रहा है। यही कारण है ब्‍लागवाणी कुछ लोगों की ऑंख की किरकिरी बना रहता है। अरूण जी का पिछला लेख पढ़ा अच्‍छा लगा और लेख से अच्‍छा एक बात और लगी श्री मैथली जी की टिप्‍पणी


maithily said...
मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आप ब्लागवाणी को परिवार के साथ देख पांयेगे. जो आप नहीं देखना चाहते उसे आपको जबर्दस्ती नहीं दिखाया जायेगा।

मैथली जी की उपरोक्‍त बात से स्‍पष्‍ट है कि पर्दे की आड़ में ब्‍लागवाणी एक पारिवारिक पार्क बना रहेगा, साथ ही साथ पर्दा हटने पर सब कुछ खुला मिलेगा। यह जरूरी भी है जो कुछ भी बातें आज ब्‍लागजगत में आ रही है हम इसे मन की भड़ास कह सकते है किन्‍तु किसी के मन की भड़ास हर किसी को अच्छी नही लगती है, और जब भड़ास निकलती है तो वह लिहाज भूल जाती है, जैसे कि मोहल्‍ले के चौराहे पर चोखेरबालियों को देखकर आवारें सीटीयॉं मारते है। इन मोहल्‍ले के आवारों की सीटियों पर भी हस्तक्षेप करना होगा। क्‍योकि दिल के दौरे की तरह समय समय पर इन्‍हे अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के दौरे पड़ते रहते है। मनचाही अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता बिल्कुल वैसी ही होनी चाहिऐ जैसी की अरूण जी ने अपने पोस्‍ट पर की थी।

मैने जानना चाहा कि अ‍ाखिर क्‍या बात है कि विवादों में ब्‍लागवाणी को घसीटे जाने का कारण क्‍या है मैने किसी और के ब्‍लाग का परिक्षण करने के अपेक्षा अपने ब्‍लाग को ही टटोलने की कोशिश कि तो निम्‍न नजीते पर पहुँचा, कि ब्‍लावाणी के मायने क्‍या है? और क्‍यो ब्‍लागवाणी को कटघरे में खड़ा किया जाता है। यह नतीजे आपके सामने है।

 

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सत्‍यानाश हो ब्‍लागवाणी का

हिन्‍दी चिट्ठाकारी की मठाधीशी अपने चरम पर है और आज नारद के बाद ब्‍लागवाणी को अपने चपेट में ले रहा है। आये दिन ब्‍लाग वाणी को लेकर विवाद किये जाते है, कि मैथली जी ये कर देना चाहिए, मैथिली जी वो कर देना चाहिऐ। जैसे मैथली जी के पास ब्‍लागवाणी की चौकीदारी के अलावा कोई काम नही है। मैथली जी के अपने कम है, ब्‍लावाणी ही बहुत कुछ है किन्‍तु सब कुछ नही है।  किन्‍तु कुछ लोग आज ऐसे भी जो ब्‍लागवाणी के नाम पर अपने ब्‍लागों की बैतरणी पार कर रहे है। लिखते कुछ नही है ब्‍लागवाणी के नाम की मोहर लगा कर गोल गप्‍पा जैसा मुँह फुला कर चले आते है। तरह तरह की वाहियात बाते ब्‍लागवाणी के नाम के आड़ में होती है।

   

ऊपर जो कुछ भी मैने लिखा है वह वाहियात बातें है क्‍योकि अनर्थ का अर्थ भी आप लोग बना देते है।  आज मै आपसे अपेक्षा करता हूँ कि ब्‍लागवाणी के नाम के जाल में दोबारा नही फँसेगे। :) रचना की रचनात्‍मकता पर जायेगे न कि ब्‍लागवाणी के नाम पर। क्‍योकि ब्‍लागवाणी के नाम पर पोस्‍ट हिट करना मात्र छलावा ही है। जो आज मैने किया है। :)

   

इसी के साथ मेरी महाशक्ति ब्‍लाग पर 200वीं पोस्‍ट भी सम्‍पन्न होती है, जिसे मै ब्‍लागवाणी तथा ब्‍लागवाणी नाम को पढ़कर पोस्‍ट क्लिक और पंसद करने वालों को सर्मपित करता हूँ। कुछ दिनों पूर्व महाशक्ति ब्‍लाग ने अपने 200 पोस्‍ट पूरी की थी। यह महाशक्ति ब्‍लाग की 212वी तथा मेंरी 200वीं पोस्‍ट है।  अंत में एक निवेदन और करूँगा कि अगर आपने अभी तक इस लेख को ब्‍लागवाणी पर पंसद नही किया है तो तुंरत पंसद कर अपने जगरूकता का परिचय दे। :)

   

अन्‍तोगत्‍वा यह एक मजाक था, और इसे आप मेरी 1 अप्रेल की पोस्‍ट भी कह सकते है क्‍योकि मेरा पुन: अवकाश लेने का समय आ गया है, और शायद ही पहली अप्रेल की पोस्‍ट कर पाऊँ :) यह अवकाश अगली परीक्षा 15 अप्रेल से प्रारम्‍भ होने के कारण ले रहा हूँ, 6 मई अथवा गरमी की छुट्टी के बाद पुन: वापसी होगी। इस पुन: मेरे ब्‍लाग को भइया देखेगे और मै भी उपस्थित रहूँगा ताकि कभी हाथ में खुजली हो तो एकाथ पोस्‍ट दाग सकूँ।

   

अन्‍त में गंवैया लहजे में- सत्‍यानाश हो ब्‍लागवाणी का बुरा चाहने वालों के लिये -

ब्‍लागों में कीड़े पडें, सात पोस्‍टों टिप्‍पणी न नसीब हो, उनका कप्‍यूटर हैंग कर जाये, ब्‍लाग पर खूब बेनाम टिप्‍पणी आये, पोस्टिग का बटन न काम करें, पोस्टिंग करते समय बिजली चली जाये, उनके ब्‍लाग पर आने वालों को 404 का चस्‍पा नज़र आये..... और भी आशीष वचन है, कि पोस्‍ट खतम नही होगी। अगर आपके पास कुछ इस तरह के आर्शीवद हो तो जरूर दीजिएगा। :)

   

अस्वीकरण - मजाक में बहुत कुछ गलत कह गया हूँ अत: कृपया अन्यथ न लें :)

संस्कार शिक्षा या सेक्स एजुकेशन

Sanskar Shiksha or Sex Education

 

पिछले सेक्‍स शिक्षा पर लेख पर श्री अरूण जी, श्री समीरलाल जी, श्री ज्ञानजी तथा श्री भुवनेश भाई की ट&#