tag:blogger.com,1999:blog-30482424.post8979066768431293094..comments2008-03-23T08:17:22.261+05:30Comments on महाशक्ति: होली खेलनी हो तो ''केरल'' आईयेmahashaktihttp://www.blogger.com/profile/17276636873316507159noreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-30482424.post-53108626770155743332008-03-23T08:17:00.000+05:302008-03-23T08:17:00.000+05:30कुछ नही कह सकती प्रमेंद्र मै यह चित्र देख नही पा र...कुछ नही कह सकती प्रमेंद्र मै यह चित्र देख नही पा रही थी...एसा क्यों होता है आदमी आदमी का ही दुश्मन...सुनीता शानूhttp://www.blogger.com/profile/11804088581552763781noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30482424.post-76910964410805942002008-03-22T13:34:00.000+05:302008-03-22T13:34:00.000+05:30प्रमेन्द्र , हिंदू एकता एवं हिंदू जाग्रति के लिए ...प्रमेन्द्र , हिंदू एकता एवं हिंदू जाग्रति के लिए किए जा रहे आपके प्रयत्न सराहनीय हैं. सुरेश चिपलूनकर जी के ब्लॉग पर अपने स्पष्ट किया है की किस तरह कठिनाई में , समय के अभाव से जूझते हुए भी अपने कितना सहयोग हिंदू हित के कार्यों के लिए दिया है. धन्यवाद.Mohini Singhhttp://www.blogger.com/profile/03183792567326995378noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30482424.post-90573774694741453522008-03-21T15:10:00.000+05:302008-03-21T15:10:00.000+05:30बहुत दुखद है मानव हत्या। और धर्म-जाति से परे रह कर...बहुत दुखद है मानव हत्या। और धर्म-जाति से परे रह कर निन्दनीय भी। यह अवश्य है कि हिन्दू के मारे जाने की खबरें खबरें नहीं बनतीं। :(Gyandutt Pandeyhttp://www.blogger.com/profile/05293412290435900116noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30482424.post-80111792483291363022008-03-21T14:46:00.000+05:302008-03-21T14:46:00.000+05:30भाई प्रमेन्द्र जी,हिन्दुजाग्रती.कॉम को काफी अरसे स...भाई प्रमेन्द्र जी,<BR/>हिन्दुजाग्रती.कॉम को काफी अरसे से देख रहा हूँ इसलिए आँख मूँद कर तो विश्वास नहीं कर सकता | लेकिन आपकी बात सही है, इसी मुद्दे पर भारतीय संसद में भी बात उठी थी तो ये कहना कि इस कुकृत्य के बारे में चर्चा नहीं हुयी पूरी तरह से सत्य नहीं है | इस कृत्य कि जितनी भी निंदा की जाए कम है |<BR/><BR/>आपको एवं आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें |Neeraj Rohillahttp://www.blogger.com/profile/09102995063546810043noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-30482424.post-72885570975295183352008-03-21T14:10:00.000+05:302008-03-21T14:10:00.000+05:30कल चित्र हमनें भी दॆखे थे।पता नहीं ये सब क्यूँ होत...कल चित्र हमनें भी दॆखे थे।पता नहीं ये सब क्यूँ होता है? इंसान जानवरों जैसे कृत कैसे कर पाता है।जानवर जब भूखा होता है तभी किसी को मारता है लेकिन इंसान शायद जानवरॊं से भी ज्यादा बदतर हो चुका है।परमजीत बालीhttp://www.blogger.com/profile/01811121663402170102noreply@blogger.com